नई दिल्ली — राजधानी के शिक्षा और राजनीति दोनों पर असर डालने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन ने विश्वविद्यालय के सभी परिसरों में 17 फ़रवरी, 2026 से एक महीने के लिए सीधे सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन, रैलियाँ और सभा-प्रदर्शन बैन कर दिए हैं। इस निर्देश के अनुसार छात्रों द्वारा कोई भी बड़ा विरोध, प्रदर्शन या इकट्ठा होने वाली गतिविधि अगले एक महीने तक विश्वविद्यालय परिसर में नहीं की जा सकेगी।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर कार्यालय ने इस बैन को लागू करने का कारण शांति और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखना बताया है। इस फैसले के बाद छात्रों और फैकल्टी ग्रुप में इस फैसले को लेकर मतभेद और विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कई छात्र और शिक्षाविद् इसे स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर पाबंदी के रूप में देखते हुए आलोचना कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय सुरक्षा कारणों से ज़रूरी था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैन केवल DU तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली में बढ़ते छात्र-राजनीति और नए मुद्दों के बीच गहरी बहस को जन्म दे रहा है। इस फैसले की वजह से राजधानी में शिक्षा नीतियों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी चर्चा शुरू हो गई है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियाँ अपने विचार साझा कर रही हैं।
विशेष रूप से, कुछ छात्र संगठनों ने इसे अधिकारों की सीमाओं में अनुचित हस्तक्षेप बताया है और अब वे कोर्ट में भी इस फैसले को चुनौती देने की बात कर रहे हैं।
